Hindi Muhavare मुहावरे और भावार्थ Muhavare in Hindi

The use of Hindi Muhavare and proverbs is useful for the prosperity of language and the development of its expression capacity. The use idioms in any language leads to vitality and conductivity, resulting in the reader or listener being quickly affected. More Hindi Muhavare are used, the more effective and interesting the expression capacity will be.

The ‘Muhavara’ is an Arabic word which means ‘to practice’ or ‘to be addicted’. Thus the word Muhavara is a phrase in itself because it gives unusual meaning except for its common meaning that reveals a great idea or emotion.

Using Muhavare increases the following properties in the language:



Language becomes strong, strong and effective.
The speaker successfully expresses his heartfelt emotions effectively in the shortest terms.
The meaning of the speaker becomes clear in the shortest possible terms.
The consonant power of the language develops.

लोकप्रिय हिंदी मुहावरे List of Famous Hindi Muhavare

आँख पर मुहावरे और उनके वाक्य में प्रयोग

आँखों में धूल झोंकना – धोखा देना।

वाक्य-प्रयोग-तुमने उसकी आँखों में धूल झोंक दी।

आँख चुराना – छिप जाना।

मुझसे रुपये उधार लेने के बाद मोहन निरन्तर आँख चुराता रहता है, मेरे सामने नहीं आता।

आँखें फेरना – उपेक्षा करना, कृपा दृष्टि न रखना।

जिससे ईश्वर भी आँखे फेर ले, भली कोई उसकी सहायता कैसे कर सकता है।

आँख दिखाना — क्रुद्ध होना।

उधार लेते समय प्रत्येक व्यक्ति बड़े प्रेम से बात करता है, किन्तु वापस करते समय आँख दिखाना साधारण-सी बात है।

आँखें बिछाना – आदरपूर्वक किसी का स्वागत करना।

यहाँ कोई ऐसा नहीं है, जो तुम्हारे लिए आँखें बिछाए बैठा रहेगा, व्यर्थ के भुलावे में न रहो।

आँख मिलाना – सामने आना।

अपनी कलई खुल जाने के बाद रमेश मुझसे आँख मिलाने का साहस नहीं रखता।

आँखें खुल जाना — वास्तविकता का ज्ञान होना, सीख मिलना।

विवेक के अपहरण में उसके मित्र की संलिप्तता देखकर लोगों की आँखें खुल गईं कि अब किसी पर विश्वास करने का जमाना नहीं रह गया है।

आँखें नीची होना – लज्जा से गड़ जाना, लज्जा का अनुभव करना।

छेड़खानी के आरोप में बेटे को हवालात में बन्द देखकर पिता की आँखें नीची हो गईं।

आँखें चार होना/आँखें दो-चार होना – प्रेम होना।

दुष्यन्त और शकुन्तला की आँखें चार होते ही उनके हृदय में प्रेम का उद्रेक हो गया।

आँख का तारा – अत्यन्त प्यारा।

प्रत्येक सुपुत्र अपने माता-पिता की आँखों का तारा होता है।

आँखों पर परदा पड़ना – विपत्ति की ओर ध्यान न जाना।

कमला की आँखों पर तो परदा पड़ गया, जो उसने गुस्साई बहू को दुकान से मिट्टी का तेल लेने भेज दिया।

आँखों में धूल झोंकना – धोखा देना।

राम बहुत समझदार है तो भी किसी व्यक्ति ने उसकी आँखों में धूल झोंककर उसे नकली नोट दे दिया।

कान पर मुहावरे, अर्थ और उनके वाक्य में प्रयोग

कान भरना – चुगली करना।

मोहन ने सोहन से कहा कि आज साहब नाराज हैं, किसी ने उनके कान भरे हैं।

कान खड़े होना – सचेत होना।

अपने सम्बन्ध में बात होते देखकर उसके कान खड़े हो गए।

कान का कच्चा होना — बिना सोचे-विचारे दूसरों की बातों पर विश्वास करना।

कान का कच्चा व्यक्ति अच्छा राजा या कुशल प्रशासक नहीं हो सकता।

कान पकडना – माफी मागना ।

‌‌‌तुमने गलती की है इस कारण से तुम्हे कान पकडना ही होगा ।

कान काटना – मात देना, बढ़कर होना।

भाषण प्रतियोगिता में छोटी कक्षा के छात्र ने बड़ी कक्षा के छात्र के कान काट लिए।

कान खाना – निरन्तर बातें करके परेशान करना।

यद्यपि उस समय उसकी बात सुनने की मेरी कोई इच्छा नहीं थी, तथापि उसने मेरे कान खाकर मुझे परेशान कर दिया।

कान पर जूं न रेंगना – बार-बार कहने पर भी प्रभाव न होना।

अब अनुत्तीर्ण हो जाने पर क्यों रोते हो? जब मैं पढ़ने के लिए बार-बार कहता था, तब तुम्हारे कानों पर जूं भी न रेंगती थी।

कान खुजलाना – ‌‌‌सही तरह से कोई बात न सुनना ।

मंत्रीजी के भाषणो को सुन कर कुछ लोग कान खुजलाने लगे ।

कान पकड कर रोना – अपनी गलती पर शर्मिंदा ‌‌‌होना ।

तुम मेरी बात पर अब ध्यान नही दे रहे हो मगर जब तुम्हारा बडा नुकसान होगा तो कान पकडकर रोने लगोगे ।

कानों कान खबर न होना – बिल्कुल पता ‌‌‌न होना ।

‌‌‌सरोज की बेटी एक कुलफी वाले के साथ भाग गई और तुम्हे इस बारे मे कानों कान का खबर न हुई ।

कान मे तेल डालना – सुनकर ‌‌‌अनसुना करते रहना ।

‌‌‌राम तो कान मे तेल डाल कर बैठा है ।

एक कान से सुन कर दूसरे से निकलाना – अनसुनी करना ।

‌‌‌मैं तुम्हें जीवन जीने के बारें मे बता रहा हूं और तुम हो एक कान से सुनकर दूसरे से निकालने में लगे हो ।

दीवारों के कान होना – ‌‌‌गुप्त बात का प्रकट होने का खतरा होना ।

ज़रा धिरे-धिरे बोलो आज कल दीवारों के भी कान होते हैं ।

कान के नीचे बजाना – ‌‌‌मार पिट करना ।

तुम ऐसे मेरी बात नही मानोगे तुम्हारे कान के निचे बजाना होगा ।

कान पर हाथ रखना – साफ साफ इनकार कर देना ।

‌‌‌महेश ने मेरी पूरी बात सुने बगेर ही कान पर हाथ रख लिया ।

कान में कहना – दूसरों को न सुनाना।

‌‌‌यहां पर काफी लोग है तुम जो भी कहना चाहते हो वह कान कह दो ।

कान में अंगुली ‌‌‌देना – किसी की बात न सुनना ।

‌‌‌मैं तुम्हारी बात सुनते ही कान मे अंगुली दे लेता हूं फिर भी तुम मेरे से साहयता मागने की बात कर रहे हो ।

कान खराब होना – सुनाई न देना ।

‌‌‌परताब का कान अब खराब हो गया है अब उसके सामने कुछ भी बड बडा लो उसे पता भी

हिंदी के अन्य मुहावरे और उनके वाक्य में प्रयोग

अँगूठा दिखाना – इनकार करना।

जब कृष्णगोपाल मन्त्री बने थे तो उन्होंने किशोरी को आश्वासन दिया था कि जब उसका बेटा इण्टर कर लेगा तो वह उसकी नौकरी लगवा देंगे। बेटे के प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने पर किशोरी ने उन्हें याद दिलाई तो उन्होंने उसे अँगूठा दिखा दि

फूले न समाना – अत्यधिक प्रसन्न होना।

राम के अभिषेक की बात सुनकर कौशल्या का अंग-अंग फूले नहीं समाया।

अन्धे की लाठी लकड़ी होना – एकमात्र सहारा होना।

निराशा में प्रतीक्षा अन्धे की लाठी है।

अम्बर के तारे गिनना – नींद न आना।

तुम्हारे वियोग में मैं रातभर अम्बर के तारे गिनता रहा।

अन्धे के हाथ बटेर लगना – भाग्यवश इच्छित वस्तु की प्राप्ति होना।

तृतीय श्रेणी में स्नातक लोकेन्द्र को क्लर्क की नौकरी क्या मिली, मानो अन्धे के हाथों बटेर लग गई।

अन्धों में काना राजा – मूर्खों के बीच कम ज्ञानवाले को भी श्रेष्ठ ज्ञानवान् माना जाता है।

कभी आठवीं पास मुंशीजी अन्धों में काने राजा हुआ करते थे; क्योंकि तब बारह-बारह कोस तक विद्यालय न थे।

अक्ल का अन्धा – मूर्ख।

वह लड़का तो अक्ल का अन्धा है, उसे कितना ही समझाओ, मानता ही नहीं है।

अक्ल के घोड़े दौड़ाना – हवाई कल्पनाएँ करना।

परीक्षा में सफलता परिश्रम करने से ही मिलती है, केवल अक्ल के घोड़े दौड़ाने से नहीं।

अक्ल चरने जाना – बुद्धिमत्ता गायब हो जाना

तुमने साठ साल के बूढ़े से 18 वर्ष की लड़की का विवाह कर दिया, लगता है तुम्हारी अक्ल चरने गई थी।

अक्ल पर पत्थर पड़ना – बुद्धि नष्ट होना।

राजा दशरथ ने कैकेयी को बहुत समझाया कि वह राम को वन भेजने का वरदान न माँगे; पर उसकी अक्ल पर पत्थर पड़े हुए थे; अत: वह न मानी।

अधजल गगरी छलकत जाए – अज्ञानी पुरुष ही अपने ज्ञान की शेखी बघारते हैं।

आठवीं फेल कोमल अपनी विद्वत्ता की बड़ी-बड़ी बातें करती है। आखिर करे भी क्यों नहीं, अधजल गगरी छलकत जाए।

अन्न-जल उठना – मृत्यु के सन्निकट होना।

रामेश्वर की माँ की हालत बड़ी गम्भीर है, लगता है कि अब उसका अन्न-जल उठ गया है।

अपना उल्लू सीधा करना – अपना काम निकालना।

कुछ लोग अपना उल्लू सीधा करने के लिए दूसरों को हानि पहुँचाने से भी नहीं चूकते।

अंगारे उगलना – क्रोध में लाल–पीला होना

अभिमन्यु की मृत्यु से आहत अर्जुन कौरवों पर अंगारे उगलने लगा।

अपना उल्लू सीधा करना – अपना काम निकालना।

कुछ लोग अपना उल्लू सीधा करने के लिए दूसरों को हानि पहुँचाने से भी नहीं चूकते।

अपनी खिचड़ी अलग पकाना – सबसे पृथक् कार्य करना।

कुछ लोग मिलकर कार्य करने के स्थान पर अपनी खिचड़ी अलग पकाना पसन्द करते हैं।

अपने मुँह मियाँ मिट्ठ बनना – अपनी प्रशंसा स्वयं करना।

अपने मुँह मियाँ मिट्ठ बननेवाले का सम्मान धीरे-धीरे कम हो जाता है।

अपने पैरों पर खड़ा होना – स्वावलम्बी होना।

जब तक लड़का अपने पैरों पर खड़ा न हो जाए, तब तक उसकी शादी करना उचित नहीं है।

अपने पाँव में कुल्हाड़ी मारना – अपने अहित का काम स्वयं करना।

तुमने अपने मन की बात प्रकट करके अपने पाँव में स्वयं कुल्हाड़ी मारी।

आकाश-पाताल एक करना – अत्यधिक प्रयत्न अथवा परिश्रम करना।

वानरों ने सीताजी की खोज के लिए आकाश-पाताल एक कर दिया।

अन्धाधुन्ध लुटाना – बहुत अपव्यय करना।

उद्योगपतियों और बड़े व्यापारियों की बीवियाँ अन्धाधुन्ध पैसा लुटाती हैं।

अन्न न लगना– खाकर–पीकर भी मोटा न होना।

अभय अच्छे से अच्छा खाता है, लेकिन उसे अन्न नहीं लगता।

अधर में लटकना या झूलना – दुविधा में पड़ा रह जाना।

कल्याण सिंह भाजपा में पुन: शामिल होंगे यह फैसला बहुत दिन तक अधर में लटका रहा।

अंग टूटना – थकावट से शरीर में दर्द होना।

दिन भर काम करा अब तो अंग टूट रहे हैं।

आँचल-बाँधना/गाँठ बाँधना – याद कर लेना।

यह बात प्रत्येक कन्या को आँचल-बाँध लेनी चाहिए कि सास-ससुर को अपने माता-पिता माननेवाली बहू ही ससुराल में आदर पाती है।

आग-बबूला होना – अत्यधिक क्रोध करना।

नौकरानी से टी-सेट टूट जाने पर मालकिन एकदम आग-बबूला हो गई।

आग में घी डालना – क्रोध अथवा झगड़े को और अधिक भड़का देना।

बेटी के मुँह से बहू की शिकायत सुनकर सास वैसे ही भरी बैठी थी, बस बहू की टिप्पणी ने तो जैसे आग में घी डाल दिया और सास ने रौद्र रूप दिखाते हुए बहू को चोटी पकड़कर घर से बाहर कर दिया।

आड़े हाथों लेना – शर्मिन्दा करना।

मोहन बहुत बढ़-चढ़कर बातें कर रहा था, जब मैंने उसे आड़े हाथों लिया तो उसकी बोलती बन्द हो गई।

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